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कुछ पर कार्रवाई, कुछ को राहत? अतिक्रमण अभियान पर उठे सवाल

सूरजपुर/भटगांव:– नगर पंचायत भटगांव में इन दिनों अतिक्रमण हटाने को लेकर प्रशासनिक सक्रियता अचानक बढ़ गई है। नगर पंचायत, एसईसीएल प्रबंधन, राजस्व विभाग, तहसील प्रशासन और सुरक्षा विभाग की ओर से नोटिस जारी किए जा रहे हैं, शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं और कार्रवाई का माहौल बनाया जा रहा है। लेकिन इस पूरी कवायद के बीच भटगांव की जनता एक बड़ा सवाल पूछ रही है—क्या कानून सभी के लिए समान है या फिर कार्रवाई केवल चुनिंदा लोगों तक सीमित रहने वाली है?

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अतिक्रमण वास्तव में गंभीर समस्या है, तो फिर नगर पंचायत क्षेत्र में वर्षों से जगह-जगह जमे अवैध कब्जों पर समान रूप से कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है? जनता का आरोप है कि कुछ स्थानों पर प्रशासनिक सख्ती दिखाई दे रही है, जबकि कई ऐसे इलाके हैं जहां लंबे समय से कथित अतिक्रमण बने हुए हैं और जिम्मेदार विभागों की नजर अब तक वहां नहीं पहुंची है।

लोगों के अनुसार, कोऑपरेटिव दुकान परिसर, न्यू माइंस क्वार्टर, पुराना माइंस क्वार्टर, बाजार पारा क्षेत्र तथा मुख्य सड़कों के किनारे वर्षों से कथित रूप से अवैध कब्जे बने हुए हैं। सबसे अधिक चर्चा एसईसीएल के उन आवासों को लेकर हो रही है, जहां स्थानीय लोगों के अनुसार ऐसे व्यक्तियों का कब्जा है जिनका कंपनी से प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।

यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ प्रभावशाली लोगों ने कथित मिलीभगत के दम पर एसईसीएल के आवासों पर कब्जा कर उन्हें किराये पर दे रखा है और इससे आर्थिक लाभ अर्जित किया जा रहा है। यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह केवल अतिक्रमण का नहीं बल्कि सार्वजनिक संपत्ति के दुरुपयोग का भी गंभीर मामला माना जाएगा।

बाजार पारा की मुख्य सड़क के दोनों ओर हुए अतिक्रमण को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इन्हीं अतिक्रमणों के कारण नगर पंचायत में पूर्व में स्वीकृत गौरव पथ परियोजना का निर्माण निर्धारित स्वरूप में पूरा नहीं हो सका। यदि समय रहते अतिक्रमण हटाया गया होता, तो नगर की यातायात व्यवस्था बेहतर होती और सौंदर्यीकरण की महत्वपूर्ण योजना भी सफल हो सकती थी।

अतिक्रमण के मुद्दे के साथ-साथ नगर की मूलभूत समस्याएं भी लोगों की चिंता का विषय बनी हुई हैं। नागरिकों का कहना है कि नगर पंचायत क्षेत्र के कई हिस्सों में कचरे के ढेर लगे हुए हैं और नियमित साफ-सफाई की प्रभावी व्यवस्था दिखाई नहीं देती। वहीं, पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं होने से लोगों को रोजमर्रा की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में जनता सवाल उठा रही है कि जब नगर की बुनियादी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं, तब विकास और सुशासन के दावों का वास्तविक लाभ आम नागरिकों तक कब पहुंचेगा?

जनता यह भी पूछ रही है कि यदि अतिक्रमण हटाने का अभियान निष्पक्ष है, तो पूरे नगर पंचायत क्षेत्र और एसईसीएल परिसरों का व्यापक सर्वे कर सभी अवैध कब्जाधारियों की सूची सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती? कार्रवाई केवल कमजोर और सामान्य लोगों तक ही सीमित क्यों दिखाई देती है? प्रभावशाली लोगों और कथित संरक्षण प्राप्त कब्जाधारियों पर प्रशासनिक सख्ती क्यों नहीं दिखाई देती?

स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर वर्षों से जमे अतिक्रमणों पर जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की नजर अब तक क्यों नहीं पड़ी? क्या उन्हें इन कब्जों की जानकारी नहीं थी या फिर शिकायतों के बावजूद अनदेखी की जाती रही? इन सवालों ने प्रशासनिक निष्पक्षता और जवाबदेही को लेकर लोगों के मन में संदेह पैदा कर दिया है।

हालांकि, अतिक्रमणकारियों को कथित संरक्षण या किसी प्रकार के लाभ पहुंचाने संबंधी आरोप स्थानीय नागरिकों द्वारा उठाए जा रहे सवाल और आशंकाएं हैं। इन आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच और आधिकारिक तथ्यों के आधार पर ही हो सकती है। ऐसे में आवश्यक है कि संबंधित विभाग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों को सार्वजनिक करें, ताकि जनता के बीच व्याप्त भ्रम और अविश्वास की स्थिति समाप्त हो सके।

अब भटगांव की जनता स्पष्ट जवाब चाहती है। यदि अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया जा रहा है, तो वह बिना किसी भेदभाव के पूरे नगर पंचायत क्षेत्र में दिखाई देना चाहिए। कार्रवाई हो तो सब पर हो, नियम लागू हों तो सबके लिए हों और किसी व्यक्ति, पद, पहचान या प्रभाव के आधार पर विशेष छूट न मिले। क्योंकि कानून की विश्वसनीयता तभी बनी रहती है, जब न्याय केवल होता ही नहीं बल्कि निष्पक्ष रूप से होता हुआ दिखाई भी देता है। अन्यथा जनता के मन में यह सवाल और गहराता जाएगा कि कहीं यह अभियान व्यवस्था सुधारने के बजाय केवल दिखावे और चुनिंदा कार्रवाई तक सीमित तो नहीं है।

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