जिले के शिक्षा विभाग की लापरवाही उजागर नौ महीने बाद भी शिक्षकों को नहीं मिली मूल्यांकन राशि, किस प्रक्रिया में फंसी लाखों की राशि ?
सूरजपुर:– जिले की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कक्षा 5वीं एवं 8वीं की केंद्रीकृत परीक्षा 2025 के मूल्यांकन के लिए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय सूरजपुर द्वारा शिक्षकों का भुगतान नौ महीने बाद भी जारी नहीं किया गया है। विभाग ने 13 मार्च 2025 को सभी संकुल प्राचार्यों से बैंक खाता, IFSC कोड, मोबाइल नंबर, संकुल का नाम, विकासखंड का नाम सहित सभी आवश्यक दस्तावेज तत्काल प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए थे। उद्देश्य था कि मूल्यांकन कार्य करने वाले शिक्षकों को भुगतान दिया जा सके।
लेकिन वास्तविकता यह है कि नौ महीने बीत गए, परीक्षा का नया सत्र आ गया, फिर भी आज तक एक भी शिक्षक को भुगतान नहीं किया गया।
उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किए लगभग नौ माह बीत गए लेकिन मूल्यांकनकर्ता शिक्षकों को मूल्यांकन राशि अब तक नहीं मिला है,मूल्यांकन करने वाले शिक्षकों को भी नहीं पता कि उन्हें उनका पारिश्रमिक कब मिलेगा।
आरटीआई में मिले जानकारी के अनुसार दो किस्तों में जारी हुई राशि फिर भुगतान क्यों नहीं पहुँचा शिक्षकों तक?
सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार दो किस्तों में राशि जिला शिक्षा कार्यालय को जारी किए थे।जिसमे प्रथम किस्त में 10,66,344 और द्वितीय किस्त में 11,08,940 राशि बताई गई है। विभाग द्वारा सूचना के अधिकार के तहत जानकारी में बताया गया की राशि की भुगतान प्रक्रियाधीन है,
सूत्रों के अनुसार पता चला है कि तीसरी किस्त भी जारी की गई होगी,जिसकी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है।
राशि उपलब्ध होने के बावजूद शिक्षकों को भुगतान नहीं देना बड़ा सवाल पैदा करता है।
क्या विभाग में फाइलें जानबूझकर रोकी गईं? किस स्तर पर प्रक्रिया अटकी? क्यों शिक्षकों को उनका हक नहीं मिला?
पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी भारती वर्मा पर उठ रहे गंभीर सवाल
उस समय जिले की जिम्मेदारी संभाल रहीं पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी भारती वर्मा पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जब—पैसा उपलब्ध था,संकुलों से दस्तावेज मंगाए जा चुके थे,मूल्यांकन का कार्य पूरा हो चुका था…. तो आखिर शिक्षकों को भुगतान क्यों नहीं कराया गया?
क्या यह विभागीय लापरवाही है या जिम्मेदारी से बचने का प्रयास? या और कोई खेला हो गया? ऐसे न जाने कितने सवाल खड़े हो रहे हैं जो सवालिया निशान पैदा कर रहे हैं??
शिक्षक आक्रोशित, कॉपियाँ हम जांचें और महीनों तक पैसा भी न मिले?
मूल्यांकन करने वाले कई शिक्षकों ने नाराजगी जताई है। एक शिक्षक का कहना है कि कॉपियाँ जांचने में हफ्तों लग जाते हैं। मेहनत हम करें और विभाग महीनों तक भुगतान तक न दे,क्या यही न्याय है?
पूरे प्रकरण ने जिला शिक्षा व्यवस्था की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
जब जिला स्तर के अधिकारी ही नौ महीने में एक साधारण भुगतान प्रक्रिया पूरी न कर सकें, तो जिले के सैकड़ों स्कूलों की स्थिति कैसी होगी, इसकी कल्पना करना मुश्किल नहीं है।
फाइलों का अटकना, आदेशों का पालन न होना,और शिक्षकों को बार-बार चक्कर लगवाना यह दर्शाता है कि प्रशासनिक स्तर पर गंभीर शिथिलता व्याप्त है।
अगली परीक्षा का समय आ गया, पर पिछली का भुगतान अब तक लंबित
विडंबना यह है कि वर्ष 2025–26 की नई परीक्षा की तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं। लेकिन शिक्षकों को पिछली परीक्षा का मेहनताना ही नहीं मिला है। शिक्षक पूछ रहे हैं कि क्या हर साल इसी तरह परीक्षा हो जाएगी और भुगतान लंबित ही रहेगा?
विभागीय चुप्पी कई सवाल पैदा करती है
इतने बड़े मामले पर जिला शिक्षा विभाग की खामोशी भी हैरान करने वाली है:-
यदि राशि उपलब्ध था,तो भुगतान क्यों नहीं हुआ?
यदि पैसा खर्च हो चुका है, तो किस मद में गया?
क्या कुछ छुपाने का प्रयास किया जा रहा है?
इस मामले में निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है,ताकि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
