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ज्ञानोदय मूक-बधिर विद्यालय में अमानवीयता. मूक-बधिर बच्चों से करवाया जा रहा है मजदूरी

सूरजपुर/जिले के शिक्षा की स्थिति पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूरजपुर जिले के विश्रामपुर स्थित ज्ञानोदय मूकबधिर विद्यालय में मूक बधीर बच्चों से मजदूरी कराए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना के वायरल हुए एक वीडियो में बच्चे में काम करते नजर आ रहे हैं।
यह बच्चों के शिक्षा के अधिकार का घोर उलंघन है,मूकबधिर बच्चों को शिक्षा और विकास के लिए विशेष सुविधाओं की आवश्यकता होती है और उनसे श्रम कराने की प्रवृत्ति चिंताजनक है।

सूत्रों के अनुसार, विद्यालय में बाहर जिलों से आए कई मूक-बधिर छात्र रहते हैं। इन बच्चों को पढ़ाई-लिखाई और सुरक्षित वातावरण देने के बजाय शारीरिक श्रम,सफाई,और अन्य कामों में लगाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि प्रबंधन के डर और सज़ा के भय से बच्चे विरोध भी नहीं कर पा रहे।

बता दें कि एक ही परिसर में तीन तीन संस्थानों का संचालन किया जा रहा है।वीणा कन्या महाविद्यालय, वी एम कॉलेज ऑफ नर्सिंग और डी पी एस स्कूल का संचालन हो रहा है। संचालक विजयराज अग्रवाल द्वारा एक नशा मुक्ति केंद्र भी चलाया जा रहा है जो कई वर्षों से बंद पड़ा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार,यह कृत्य न केवल बाल अधिकारों का खुला उल्लंघन है, बल्कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम और मानवीय मूल्यों का भी गंभीर हनन है।
समाजसेवी संगठनों ने इसे “मानवाधिकारों पर चोट” बताते हुए तत्काल कार्रवाई की माँग की है।

मामले के उजागर होने के बाद अभिभावकों और स्थानीय प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं कि
विद्यालय की इस शर्मनाक गतिविधि पर अब तक किसी की नज़र क्यों नहीं पड़ी?

कौन-कौन इस शोषण में शामिल है?

और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे?

बच्चों की संवेदनशीलता और उनकी विकलांगता को देखते हुए यह घटना बेहद चिंताजनक है।
जनता और समाजसेवी समूहों का मानना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो ऐसे संस्थान बच्चों के भविष्य और मानसिक स्वास्थ्य दोनों को नुकसान पहुँचाते रहेंगे।

अब पूरे क्षेत्र की नज़र प्रशासन पर है कि वह इस अमानवीय घटना पर कितना त्वरित और कठोर कदम उठाता है।

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