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बाल विवाह के खिलाफ धर्म गुरुओं का संकल्प, ‘एक्सेस टू जस्टिस’ अभियान को मिला समर्थन

सूरजपुर, 14 सितंबर 2025।समर्पित संस्था और जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन के सहयोग से चलाए जा रहे ‘बाल विवाह मुक्त भारत अभियान’ में सरगुजा जिले के सभी धर्मों के धर्म गुरुओं ने एकजुट होकर बाल विवाह जैसी कुप्रथा को जड़ से खत्म करने का संकल्प लिया। 12 से 14 सितंबर तक चले इस अभियान में धर्म गुरुओं ने समाज को जागरूक करते हुए साफ संदेश दिया कि बाल विवाह न केवल सामाजिक बुराई है, बल्कि कानूनी अपराध भी है।

कानून का उल्लंघन, सजा और जुर्माना:

समर्पित संस्था के अध्यक्ष डॉ. संदीप शर्मा ने बताया कि बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के तहत 18 वर्ष से कम उम्र की बालिका और 21 वर्ष से कम उम्र के बालक का विवाह कराना या इसमें सहयोग करना दंडनीय अपराध है। दोषी को 1 लाख रुपये तक का जुर्माना या 2 साल तक की सजा, या दोनों हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि बाल विवाह रोकथाम के लिए निशुल्क टोल-फ्री नंबर 1098 और 18001027222 पर सूचना देकर मदद ली जा सकती है।

महिलाओं के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव:

अभियान में बताया गया कि बाल विवाह से महिलाओं के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है। कम उम्र में विवाह से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है, जिसे रोकने के लिए सामाजिक जागरूकता जरूरी है।

सफल आयोजन में योगदान:

अभियान के सफल संचालन में समर्पित संस्था के राज्य समन्वयक पुरुषोत्तम पांडेय, जिला समन्वयक अनिल कुमार, संगीता खलखो, विद्या सिंह और सभी धर्म गुरुओं का विशेष योगदान रहा। इस पहल ने समाज में बाल विवाह के खिलाफ एक मजबूत संदेश देने का काम किया।

बाल विवाह मुक्त भारत की दिशा में कदम

यह अभियान न केवल सरगुजा बल्कि पूरे देश में बाल विवाह को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। धर्म गुरुओं के समर्थन से समाज में जागरूकता बढ़ाने और इस कुप्रथा को रोकने की उम्मीद जगी है।

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