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एक नगर पंचायत भटगांव और दो प्रेसिडेंट इन काउंसिल समिति कैसे ?

सूरजपुर/भटगांव:– जिले के नगर पंचायत भटगांव हालही में बीते त्रिस्तरीय नगर पंचायत चुनाव में भटगांव हाईप्रोफाइल सीट बनकर उभरा था जहां के स्थानीय विधायक व छत्तीसगढ़ कैबिनेट में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने चुनाव में भाजपा प्रत्याशी परमेश्वरी राजवाड़े को चुनाव जीतने के लिए मानो सारी शक्ति झोंक दिया था क्योंकि उनके विधानसभा क्षेत्र और भटगांव नगर पंचायत मुख्यालय के अंतर्गत आता है भाजपा प्रत्याशी परमेश्वरी राजवाड़े ने अच्छे मतों से चुनाव जीत लिया था वहीं भाजपा से ही उपाध्यक्ष के रूप में रामफल पैकरा निर्वाचित हुए थे जहां कुछ ही महीनों में ऐसा प्रतीत होने लगा है कि भाजपा पार्टी के अध्यक्ष व वार्ड पार्षदों के बीच कुछ ठीक नहीं चल रहा है जिसकी सुगबुगाहट और विरोध के स्वर लोगों के बीच दबे जुबान सुनी जा सकती है जो कब जिसको हवा तब और मिल जाती जब नगर पंचायत अध्यक्ष परमेश्वरी ने प्रेसिडेंट इन काउंसलिंग का गठन कर समिति बनाया वह भी एक नहीं दो, दो प्रेसिडेंट इन काउंसिल का गठन कर डाला जिन दोनों समिति में निर्दलीय वार्ड पार्षद को स्थान दिया गया है मजे की बात तो यह है कि नगर पंचायत भटगांव में भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई है और अधिकांश पार्षद भाजपा से जीत कर आए है, फिर भाजपा के पार्षदों को समिति में जगह क्यों नहीं दिया क्या, क्या अध्यक्ष को भाजपा पार्षदों में विश्वास नहीं जो निर्दलीय प्रत्याशियों और पार्षदों में प्रेम उमड़ पड़ा ?

क्या होता है प्रेसिडेंट इन काउंसिल

नगर पंचायत में प्रेसिडेंट इन काउंसिल का गठन अध्यक्ष और पांच सदस्यों से मिलकर होता है, जिसमें ये पांच सदस्य नगर पंचायत के निर्वाचित पार्षदों में से चुने जाते हैं, जिनमें उपाध्यक्ष के चुनाव के बाद सात दिन के अंदर प्रेसीडेंट-इन-काउंसिल का गठन होना चाहिए, जिनका कार्य प्रेसिडेंट इन काउंसिल नगर पंचायत के कामकाज का संचालन और वित्तीय अधिकारों का उपयोग करती है, जिनका अधिकार में अध्यक्ष को 3 लाख, काउंसिल को 10 परिषद को 10-50 लाख रुपए तक की राशि के कार्यों की स्वीकृति का अधिकार है वही छत्तीसगढ़ नगरपालिका ( प्रेसीडेंट इन कांउसिल के कामकाज का संचालन तथा प्राधिकारियों की शक्तियाँ एवं कर्तव्य) नियम 1998 के अनुसार कार्य स्वीकृति की प्रक्रिया की जानी चाहिए।

अध्यक्ष ने मुख्य नगरपालिका अधिकारी को लिखा पत्र

नगर पंचायत अध्यक्ष ने समिति का 2 बार गठन कर मुख्य नगरपालिका अधिकारी को अग्रिम कार्यवाही के लिए भेजा पत्र जिसमें साफ शब्दों में लिखा गया है कि नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 70 में वर्णित प्रावधान अनुसार निम्नाकित पार्षदों को उनके नाम के सम्मुख अंकित विभागों का प्रभारी नियुक्त किया जाता है। जिसमें प्रथम पत्र 13/03/2025 को जारी पत्र में लक्ष्मी महतो वार्ड नंबर 4 – आवास, पर्यावरण, लोक निर्माण विभाग, जलकार्य विभाग, रामफल पैकरा वार्ड नंबर 3 – खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, स्वस्थ्य एवं चिकित्सा विभाग, सुमित्रा राजवाड़े वार्ड नंबर 1 – राजस्व तथा बाजार विभाग, मीना पैकरा वार्ड नंबर 2 – शिक्षा, महिला एवं बाल कल्याण विभाग और निर्दलीय पार्षद सुनिता सिंह वार्ड नंबर 6 को पुनर्वास, नियोजन, विधि तथा सामान्य प्रशासन विभाग का दायित्व सौंपा गया है।

वहीं नगर पंचायत अध्यक्ष लेटर में 17/03/2025 को जारी किए गए दूसरे पत्र में लक्ष्मी महतो वार्ड नंबर 4 – आवास, पर्यावरण, लोक निर्माण विभाग, जलकार्य विभाग, रामफल पैकरा वार्ड नंबर 3 – खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, स्वस्थ्य एवं चिकित्सा विभाग, सुमित्रा राजवाड़े वार्ड नंबर 1 – राजस्व तथा बाजार विभाग मीना पैकरा वार्ड नंबर 2 – शिक्षा, महिला एवं बाल कल्याण विभाग और निर्दलीय पार्षद बबीता सिंह वार्ड नंबर 11 – पुनर्वास, नियोजन, विधि तथा सामान्य प्रशासन विभाग कार्यभार सौंपा गया है।

नगर पंचायत भटगांव के कई भाजपा समर्थित पार्षदों ने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि पार्षदों और अध्यक्ष के बीच कुछ ठीक नहीं चल रहा है यहां तक उपाध्यक्ष चुनाव में भी अध्यक्ष के द्वारा मनमानी किया और अब लगभग महीना भर में ही उनके ही समर्थन से प्रत्याशी बनकर उपाध्यक्ष बने हुए से अध्यक्ष की दूरियां साफ साफ देखी जा सकती है, यह भी बताया कि यदि समय रहते पार्टी के शीर्ष नेतृत्व इस ओर संज्ञान नहीं लेती है तो मामला और भी बिगड़ सकते है।

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