सूरजपुर और आसपास रेत का अंधाधुंध उत्खनन, खोखले हो रहे नदी-नाले, पर्यावरण पर मंडरा रहा बड़ा खतरा
सूरजपुर/ जिला मुख्यालय संयुक्त कार्यालय के समीप छठ घाट सहित आसपास के क्षेत्रों में इन दिनों रेत का अवैध और अनियंत्रित उत्खनन तेजी से बढ़ता जा रहा है। नदी-नालों से दिन-रात ट्रैक्टरों के माध्यम से रेत निकाली जा रही है, जिससे प्राकृतिक जल स्रोतों का अस्तित्व संकट में पड़ता नजर आ रहा है। लगातार हो रहे उत्खनन के कारण कई स्थानों पर नदी-नालों का स्वरूप बदलने लगा है और भूजल स्तर पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका गहराने लगी है।
ग्रामीणों की चिंता,सूखने लगे जल स्रोत
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि नदी-नालों में अब गहरे गड्ढे और सूखे हिस्से दिखाई देने लगे हैं ग्रामीणों का आरोप है कि बड़ी संख्या में ट्रैक्टर रेत निकालने में लगी रहती हैं,लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण यह सिलसिला लगातार जारी है।
प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर उठ रहे सवाल
क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि अवैध रेत परिवहन के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना का नाम लिया जाता है। बताया जा रहा है कि पिछले दो वर्षों में योजना के तहत नई स्वीकृतियां नहीं मिली थीं। वर्ष 2025-26 में 148 आवास स्वीकृत हुए हैं, जिनका निर्माण कार्य जारी है। इसके बावजूद आवास योजना के नाम पर बड़े पैमाने पर नदी-नालों से रेत निकाले जाने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। कार्रवाई के दौरान कुछ लोग प्रधानमंत्री आवास निर्माण के नाम पर रेत परिवहन को उचित ठहराने का प्रयास करते हैं, जिस पर भी चर्चा तेज है।
प्रशासनिक कार्रवाई के बावजूद नहीं लग पा रही लगाम:विष्णु वैष्णव
शिवसेना (यूबीटी) जिला प्रमुख ने चिंता जताते हुए कहा: जिले के विभिन्न हिस्सों में अवैध रेत उत्खनन को लेकर समय-समय पर प्रशासनिक कार्रवाई और पर्यावरणीय चिंताएं सामने आती रही हैं, लेकिन समस्या पर स्थायी नियंत्रण अभी तक नहीं हो सका है। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से अवैध उत्खनन पर तत्काल रोक लगाने, निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
भविष्य में गहरा सकता है जल संकट
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया गया तो आने वाले वर्षों में नदी-नाले पूरी तरह खोखले हो जाएंगे और जल संकट की समस्या और भी गंभीर रूप धारण कर सकती है। ऐसे में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए रेत के अनियंत्रित दोहन पर प्रभावी नियंत्रण की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर
अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे को लेकर कितना संवेदनशील रुख अपनाता है और धरातल पर किस प्रकार की ठोस कार्रवाई सामने आती है। क्षेत्र के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
