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बरौधी में दर्दनाक सड़क हादसा, 14 वर्षीय छात्र की मौत के बाद उठे गंभीर सवाल

क्या नाबालिगों के हाथों में बाइक देना बन रहा जानलेवा?

सूरजपुर/भटगांव:– जिले के भटगांव क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है। ग्राम पंचायत बरौधी में हुए सड़क हादसे में एक 14 वर्षीय छात्र की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य नाबालिग किशोर गंभीर रूप से घायल हो गए। इस हादसे ने न केवल पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है, बल्कि नाबालिगों के हाथों में मोटरसाइकिल देने को लेकर समाज और प्रशासन दोनों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्कूल से लौटते समय हुआ हादसा

मिली जानकारी के अनुसार तीनों किशोर स्कूल से छुट्टी होने के बाद एक ही मोटरसाइकिल (CG 15 CV 7836) से अपने घर लौट रहे थे। तीनों अलग-अलग गांवों के निवासी बताए जा रहे हैं और जरही की ओर जा रहे थे।

बताया जा रहा है कि भटगांव रोड स्थित चौहान कॉम्पलेक्स के पास मोटरसाइकिल अचानक अनियंत्रित हो गई और सड़क किनारे पेड़ से जा टकराई। टक्कर इतनी तेज थी कि बाइक चला रहे किशोर की मौके पर ही मौत हो गई।

मृतक की पहचान, दो गंभीर रूप से घायल

हादसे में मृत छात्र की पहचान धनंजय रजवाड़े (उम्र 14 वर्ष), पिता लोचन रजवाड़े, निवासी ग्राम करौंधा (कोरंधा) के रूप में हुई है। वहीं हादसे में घायल दोनों किशोरों को पहले प्राथमिक उपचार दिया गया, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण उन्हें तुरंत अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया है।

पुलिस मौके पर पहुंची, जांच शुरू

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई और आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भटगांव भेजा गया है।हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।

हादसे ने उठाए कई गंभीर सवाल

इस दर्दनाक हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर नाबालिग बच्चों के हाथों में मोटरसाइकिल कैसे पहुंच रही है?
ग्रामीणों का कहना है कि आज गांवों और कस्बों में 13–15 साल के बच्चे खुलेआम बाइक चलाते नजर आते हैं, लेकिन इस पर न तो परिवार सख्ती करता है और न ही प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई दिखाई देती है।

क्या अब भी नहीं जागेगा समाज और प्रशासन?

लगातार हो रही ऐसी दुर्घटनाओं के बावजूद स्थिति में कोई बदलाव नहीं आ रहा है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते नाबालिग बाइक चालकों पर सख्ती नहीं की गई, तो ऐसे हादसे आगे भी होते रहेंगे। बरौधी में हुई इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि लापरवाही अब सीधे बच्चों की जान पर भारी पड़ रही है।

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