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भटगांव में भूमिगत खदान पर संकट, भारतीय कोयला खदान मजदूर संघ के नेतृत्व में अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू

एसईसीएल प्रबंधन की लापरवाही से 1100 मजदूरों की रोज़ी पर खतरा, क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर अंधकार के बादल

सूरजपुर/भटगांव:– जिले के भटगांव क्षेत्र की भूमिगत कोयला खदानों के सीटीओ की स्वीकृति में हो रही लगातार देरी ने अब हालात को विस्फोटक बना दिया है। भारतीय कोयला खदान मजदूर संघ छत्तीसगढ़ ने इस गंभीर मुद्दे पर अनिश्चितकालीन आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। संघ के नेतृत्व में सोमवार से क्रमिक भूख हड़ताल शुरू हो चुकी है, जबकि 13 अक्टूबर से कोयला संप्रेषण (डिस्पैच) पूरी तरह बंद करने की चेतावनी दी गई है।

सीटीओ स्वीकृति में देरी, बंद होने की कगार पर भूमिगत खदानें

भटगांव 1 और 2 भूमिगत खदानों का सीटीओ (पर्यावरण स्वीकृति) 31 अक्टूबर 2025 तक समाप्त हो रहा है, और समय रहते नवीनीकरण नहीं होने की स्थिति में खदानों का संचालन बंद हो जाएगा। इससे एसईसीएल के लगभग 800 स्थायी मजदूर और करीब 300 ठेका मजदूर, कुल मिलाकर 1100 परिवारों की आजीविका खतरे में पड़ जाएगी।

सिर्फ मजदूर ही नहीं, बल्कि भटगांव क्षेत्र के 300 से अधिक दुकानदार, सैकड़ों किसान और स्थानीय लघु उद्योग भी इस संकट की चपेट में आएंगे।

मजदूरों का सवाल, क्या एसईसीएल प्रबंधन सोया हुआ है?

मजदूर संघ और स्थानीय लोगों का आरोप है कि एसईसीएल भटगांव क्षेत्र के प्रबंधन ने सीटीओ स्वीकृति के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किया।

मजदूरों के बीच यह सवाल गूंज रहा है, क्या एसईसीएल महाप्रबंधक भटगांव की नाकामी के कारण यह खदान बंद होने की कगार पर है ? क्या सबएरिया, मैनेजर और संबंधित अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं?

अस्थायी नेतृत्व से बिगड़ती स्थिति, कब मिलेगा स्थायी समाधान?

संघ का आरोप है कि एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर ने वर्षों से भटगांव क्षेत्र की उपेक्षा की है। हर बार रिटायरमेंट के करीब पहुंचे अधिकारियों को ही महाप्रबंधक बनाकर भेजा जाता है, जिनका कार्यकाल एक-दो वर्ष से अधिक नहीं होता। ऐसे अस्थायी नेतृत्व में क्षेत्र के विकास और स्थायित्व की कोई योजना नहीं बन पाती। संघ का कहना है कि भटगांव को अब दीर्घकालिक, सक्रिय और दूरदर्शी नेतृत्व की आवश्यकता है, जो खदानों को बचा सके।

भटगांव क्षेत्र का भविष्य अधर में, स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका

खदान बंद होने की स्थिति में भटगांव क्षेत्र की पूरी अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी। कोयला उत्पादन और परिवहन से जुड़े सैकड़ों परिवार, व्यापारी, ट्रांसपोर्टर, किसान और लघु उद्योग सीधे प्रभावित होंगे। मजदूर संगठन का कहना है कि अगर खदान बंद हुई तो यह केवल रोजगार का नहीं बल्कि भटगांव क्षेत्र के अस्तित्व का प्रश्न बन जाएगा।

संघ की चेतावनी, जब तक समाधान नहीं, तब तक संघर्ष जारी रहेगा

भारतीय कोयला खदान मजदूर संघ छत्तीसगढ़ के ने स्पष्ट कहा है, हमारा संघर्ष मजदूरों की रोज़ी-रोटी ही नहीं, बल्कि भटगांव क्षेत्र के भविष्य की लड़ाई है।

जब तक सीटीओ की स्वीकृति और खदान संचालन की गारंटी नहीं मिलती, आंदोलन जारी रहेगा।

संघ ने यह भी चेताया है कि यदि एसईसीएल प्रबंधन ने जल्द कदम नहीं उठाया, तो यह आंदोलन पूरे एसईसीएल क्षेत्र में व्यापक रूप ले सकता है।

भटगांव क्षेत्र के मजदूर अब कोयला मंत्रालय और एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं। वे उम्मीद कर रहे हैं कि मंत्रालय हस्तक्षेप कर सीटीओ स्वीकृति की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करेगा।

अब देखना यह होगा कि क्या मजदूरों की यह पुकार शासन-प्रशासन तक पहुँचेगी या फिर भटगांव का भविष्य सचमुच अंधकार में डूब जाएगा।

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