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जांच की अलग अलग रिपोर्ट ने मरीज को उलझाया, जिला चिकित्सालय की स्वास्थ्य व्यवस्था से मरीज परेशान

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सूरजपुर/जिला चिकित्सालय सूरजपुर में 24/08/2025 को ग्राम पंचायत कूरुवां की सिकलिंग से पीड़ित एक महिला एडमिट होती है,जिसका जिला चिकित्सालय के लैब में 11 दिन में तीन बार हीमोग्लोबिन टेस्ट होता है परंतु हर बार अलग-अलग रिपोर्ट आया जिससे मरीज को समझ में नहीं आ रहा है कौन सा रिपोर्ट सही है और किस रिपोर्ट के आधार पर इलाज होगा डाक्टर भी सही इलाज तभी कर पाएंगे जब उन्हें सही रिपोर्ट मालूम होगा,सबसे महत्वपूर्ण है की यदि टेस्ट रिपोर्ट से भ्रम का स्थिति बनेगा तो मरीज का सही इलाज होने के बजाय और उलझ जाएगा। . क्या है पूरा मामला .मामला जिला मुख्यालय सूरजपुर का है जहां ग्राम पंचायत कुरूवां निवासी खुशबू ठाकुर पति अंगद ठाकुर तबीयत खराब होने पर जिला चिकित्सालय आए जहां इन्हें एडमिट कर ब्लड टेस्ट के लिए कहा गया,लैब में तीन बार हीमोग्लोबिन टेस्ट किया गया हर बार अलग-अलग रिपोर्ट बताई गई। अलग-अलग रिपोर्ट देखकर डाक्टर इलाज कैसे करेंगे इन रिपोर्ट से जिला चिकित्सालय के लैब की रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल पैदा हो गए हैं।

असमंजस में मरीज और परिजन

                              क्या ऐसे रिपोर्ट के आधार पर मरीज को बेहतर इलाज मिल पाएगा..?                         लगातार विवादों में घिरे रहने वाले जिला चिकित्सालय की अव्यवस्थाओं पर संज्ञान कौन लेगा..?                                                     .*क्या लापरवाही और कुछ स्टाफ के खराब व्यवहार से निजी अस्पताल में पलायन को मजबूर मरीज..?*

क्या जिला अस्पताल की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था के कारण मरीजों को मजबूरन प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के लिए जाना पड़ रहा है..? आसपास गांवों से भी सैकड़ों लोग इलाज के लिए यहां आते हैं,क्या डॉक्टरों की कमी,कुछ स्टाफ का मरीजों के साथ खराब व्यवहार और लचर व्यवस्थाओं के चलते निजी चिकित्सालयों के तरफ पलायन करने पर विवश है..? .

इस मामले में शिवसेना जिला अध्यक्ष (ubt) ने कहा की सूरजपुर जिला अस्पताल की लैब में जांच रिपोर्ट को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है।
इसके अलावा वार्ड में कुछ नर्सों का व्यवहार मरीजों के प्रति अत्यंत अमानवीय है।यह बेहद शर्मनाक है,एक तो चिकित्सक समय से नहीं पहुंचते हैं,और कब आएंगे कब चले जाएंगे कोई पता नहीं मरीजों की भीड़ लगी रहती है। वार्डों में मरीज भगवान भरोसे पड़े रहते हैं कोई देखने वाला नही
इस लापरवाही और अमानवीयता पर यदि जल्द कार्रवाई नहीं होती है,तो शिवसेना कड़ी प्रतिक्रिया देने के लिए बाध्य होगी।

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