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दवनकरा समिति में घोटाला। कलेक्टर से निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर ज्ञापन


सुरजपुर/प्रतापपुर कर्मक्रांति- आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित, दवनकरा में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और नियमों की अवहेलना का गंभीर मामला प्रकाश में आया है। निलंबित समिति प्रबंधक संतोष नाविक पर धान स्टॉक, नकद राशि और अन्य वित्तीय गड़बड़ियों के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। समिति के सदस्यों द्वारा कलेक्टर सूरजपुर को एक ज्ञापन सौंपा गया है, जिसमें तत्काल जांच और कठोर कार्रवाई की मांग की गई है।

निलंबन आदेश की अवहेलना

संतोष नाविक को दिनांक 02 जनवरी 2025 को 1,54,500/- की फर्जी निकासी के आरोप में निलंबित किया गया था। निलंबन के बावजूद, नाविक अब भी दवनकरा समिति में कार्यरत है और खाद वितरण सहित अन्य कार्यों में हस्तक्षेप कर रहा है। यह स्पष्ट रूप से प्राधिकृत अधिकारी के आदेश का उल्लंघन है, जिससे समिति के सदस्यों और किसानों में असंतोष व्याप्त है।

धान स्टॉक में 63 लाख की कमी

2 जनवरी को अपर कलेक्टर और एसडीएम प्रतापपुर के नेतृत्व में हुए भौतिक सत्यापन में लगभग 63 लाख मूल्य के धान स्टॉक की कमी पाई गई थी। लेकिन आज तक न तो इस मामले में एफआईआर दर्ज हुई है और न ही कोई ठोस कदम उठाया गया है। इससे आरोपियों का मनोबल बढ़ा हुआ है।

119 क्विंटल धान की कालाबाजारी

नाविक पर पहले भी 119 क्विंटल धान की कालाबाजारी का आरोप सिद्ध हो चुका है। इसके बावजूद उसके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की गई। यह सवाल खड़ा करता है कि क्या विभागीय अधिकारियों द्वारा उसे जानबूझकर संरक्षण दिया जा रहा है?

वर्तमान प्रभार में भी हस्तक्षेप

दवनकरा समिति का वित्तीय प्रभार फिलहाल सोनगरा समिति प्रबंधक के पास है। लेकिन संतोष नाविक अब भी कर्मचारियों पर दबाव बना रहा है और कार्यों में हस्तक्षेप कर रहा है। इससे स्पष्ट है कि वह अपने प्रभाव का दुरुपयोग कर रहा है।

विभागीय अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप

ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि विभागीय अधिकारी मामले को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, मोटी रकम के लेन-देन से मामले को रफा-दफा करने की कोशिश हो रही है।

ज्ञापन में निम्न मांगें की गई हैं:

संतोष नाविक के प्रवेश पर रोक: दवनकरा समिति में उनका प्रवेश तत्काल प्रतिबंधित किया जाए। एफआईआर और सख्त कार्रवाई: 63 लाख के धान स्टॉक की कमी और अन्य वित्तीय गड़बड़ियों पर तुरंत एफआईआर दर्ज हो। निलंबन के बजाय बर्खास्तगी: समिति प्रबंधक को निलंबन के बजाय बर्खास्त किया जाए, क्योंकि वह समिति के अधीन कार्यरत है। निष्पक्ष जांच: पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को दंडित किया जाए। विभागीय अधिकारियों की भूमिका की जांच: यह सुनिश्चित किया जाए कि विभागीय अधिकारी किसी भी प्रकार से आरोपियों को संरक्षण न दें।

ग्रामीणों में रोष और कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों और समिति के सदस्यों का कहना है कि संतोष नाविक के कार्यकाल में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। वे चाहते हैं कि इस पूरे मामले में पारदर्शिता रखी जाए और जिम्मेदार व्यक्तियों पर कठोर कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन जल्द कार्रवाई नहीं करता है, तो वे बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।

प्रशासन की भूमिका पर सवाल

जानकारों का कहना है कि समिति प्रबंधक को निलंबन नहीं बल्कि बर्खास्तगी का प्रावधान होना चाहिए। इतने बड़े वित्तीय घोटाले के बाद भी कार्रवाई में हो रही देरी प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़ा करती है।
दवनकरा समिति में वित्तीय अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन का यह मामला प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है। यदि जल्द ही इस पर कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो यह किसानों और समिति के सदस्यों के विश्वास को और अधिक ठेस पहुंचा सकता है। प्रशासन को तत्काल जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

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