टेट अनिवार्यता के विरोध में दिल्ली के रामलीला मैदान में उमड़ा हुजूम
सूरजपुर के शिक्षक भी हुए शामिल
सूरजपुर- शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के खिलाफ देशभर के शिक्षकों ने शनिवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में जोरदार प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में छत्तीसगढ राज्य सहित विभिन्न राज्यों से भी हजारों की संख्या में शिक्षक शामिल हुए। गौर तलब है कि टीईटी अनिवार्य कर दिए जाने से बडी संख्या में शिक्षकों की नौकरी संकट में पड़ गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के समस्त शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य कर दिया है, जबकि शिक्षकों की नियुक्ति के समय सेवा शर्तों में इसका उल्लेख था ही नहीं। नियुक्ति के समय निर्धारित योग्यता, शर्तों को पूर्ण कर ही शिक्षक अपनी सेवा में आये थे। इसके कारण पूरे देशभर के हजारों शिक्षकों की नौकरी खतरे में आ गई है। टीईटी अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों में केंद्र एवं राज्य सरकारों के प्रति काफी आक्रोश व्याप्त है। हजारों शिक्षक ऐसे हैं, जो टीईटी उत्तीर्ण नहीं है। नौकरी सुरक्षित रखने, टीईटी की अनिवार्यता को समाप्त करने शिक्षकों ने मोर्चा खोल दिया है।
शनिवार को राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में देशभर के हजारों शिक्षकों ने विरोध प्रदर्शन किया। छत्तीसगढ़ से छत्तीसगढ़ प्रदेश संयुक्त शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष केदार जैन की अगुवाई में संघ के हजारों साथी शामिल हो अपनी मांगों की लिए आवाज बुलंद किये। सूरजपुर से जिलाध्यक्ष सचिन त्रिपाठी के मार्गदर्शन में प्रतापपुर ब्लॉक अध्यक्ष राजकुमार सिंह के नेतृत्व में दिनेश कुमार पाण्डेय, भास्कर सिंह सहित अनेक शिक्षक साथी दिल्ली के रामलीला मैदान में शामिल हो काले कानून का विरोध किये।
टीचर फेडरेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व संयुक्त शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष केदार जैन ने बताया कि यह आंदोलन टीईटी की अनिवार्यता को रद्द करने, काला कानून वापस लेने तथा शिक्षकों की नौकरी पर मंडरा रहे खतरे को खत्म करने के लिए हो रहा है। प्रदर्शन के दौरान भाजपा के वरिष्ठ सांसद जगदंबिका पाल ने मंच पर पहुंचकर शिक्षकों की मांगों का समर्थन किया और कहा कि देश में किसी भी शिक्षकों के साथ कोई अहित नहीं होने दिया जाएगा। इस मुद्दे पर वे स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान से बात करेंगे। केदार जैन ने कहा कि यदि सरकार कानून को वापस नहीं लेती है तो आने वाले दिनों में देशभर के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में भी व्यापक आंदोलन होगा।
