सूरजपुर में गूंजा संविधान बचाओ का स्वर, टी.एस. सिंहदेव ने कहा – संविधान ही लोकतंत्र की आत्मा है
सूरजपुर/:– सूरजपुर जिले में शनिवार को आयोजित जिला स्तरीय ‘संविधान बचाओ रैली’ ऐतिहासिक जनसैलाब और जोशपूर्ण नारों के बीच संपन्न हुई। यह रैली न केवल जन-जागरूकता का प्रतीक बनी, बल्कि लोकतंत्र की मूल भावना की पुनः स्थापना का संदेश भी देती नज़र आई। इस रैली की विशेष बात यह रही कि छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं सरगुजा महाराज टी.एस. सिंहदेव ने शिरकत कर जनसमूह को संबोधित किया और संविधान की रक्षा को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया।
अग्रसेन चौक पर जैसे ही रैली पहुंची, वहां पहले से मौजूद हज़ारों लोगों की भीड़ ने उत्साहपूर्वक नेताओं और वक्ताओं का स्वागत किया। तिरंगा, संविधान की प्रस्तावना और लोकतंत्र के समर्थन में तख्तियां लिए युवाओं की टोली ने पूरे माहौल को राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कर दिया।
सभा को संबोधित करते हुए सिंहदेव ने संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, उसकी प्रस्तावना और मौलिक अधिकारों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, आज समय की मांग है कि हर नागरिक संविधान की रक्षा के लिए आगे आए। यह केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, यह हम सबका नैतिक कर्तव्य है।
अपने जोशीले अंदाज़ में उन्होंने मंच से सवाल उठाया –संविधान की रक्षा कौन करेगा?
जिसका जनसमूह ने एकस्वर में उत्तर दिया –
हम करेंगे, हम करेंगे!
इस संवाद ने जैसे जनता में नई ऊर्जा भर दी और संपूर्ण क्षेत्र में लोकतांत्रिक चेतना की गूंज फैल गई।
रैली में युवा, महिलाएं, सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र संगठन और वरिष्ठ नागरिक भारी संख्या में उपस्थित रहे। विशेष रूप से छात्रों की भागीदारी उल्लेखनीय रही, जिन्होंने हाथों में संविधान की प्रति लिए मार्च किया और रैली को सार्थक संदेश प्रदान किया। कई स्वयंसेवी संगठनों ने भी इस आयोजन में सहयोग दिया।
सिंहदेव ने अपने संबोधन में स्पष्ट कहा कि यह केवल संविधान बचाने की बात नहीं, यह उस मूल विचार को बचाने की लड़ाई है जिस पर यह देश खड़ा है। अगर संविधान कमजोर हुआ, तो देश का लोकतांत्रिक ढांचा खतरे में पड़ जाएगा।” उन्होंने रैली को एक दीर्घकालिक जनआंदोलन में बदलने का आह्वान किया।
रैली के समापन पर यह स्पष्ट हो गया कि यह केवल एक दिन की सभा नहीं थी, बल्कि एक दीर्घकालिक प्रयास की शुरुआत थी। लोगों ने लोकतंत्र, समानता, स्वतंत्रता और न्याय के मूल्यों की रक्षा का संकल्प लिया और आने वाले समय में संवैधानिक चेतना को जन-जन तक पहुंचाने की बात कही।
